प्रेक्टिकल अंक देने के मामले में कतिपय निजी स्कूलों पर सवाल खडा हुआ थ्योरी में विद्यार्थी को 17 नंबर , प्रेक्टिकल में 20अंक पूरे…! -सीबीएसई के निजी स्कूलों में ऐसे कई मामले सामने आए

उज्जैन। जिस विद्यार्थी की थ्योरी ही पूर्ण नहीं है और उसे प्रेक्टिकल में पूरे नंबर मिल जाएं इस पर सवाल खडा हो रहा है। इस बार के कक्षा 10 वीं बोर्ड के परिणाम में इसे लेकर बच्चों में भेदभाव की चर्चा आम है। कई ऐसे बच्चों का उदाहरण दिया जा रहा है जिन्हें परीक्षा की थ्योरी में कुल 80 में से  15 और 17 नंबर मिले हैं लेकिन इंटरनल कहे जाने वाले प्रेक्टिकल में 20 में से पूरे 20 अंक दिए गए हैं। सीधे तौर पर ही इस पर सवाल खडा होना लाजिमी है।

बुधवार को जारी सीबीएसई एवं मध्यप्रदेश माध्यमिक शिक्षा मंडल के कक्षा 10 वीं परिणाम के उपरांत  विद्यार्थी इसका विश्लेषण कर रहे हैं। इस विश्लेषण में शहर के कतिपय निजी सीबीएसई विद्यालयों में दिए गए इंटरनल अंकों को लेकर भेदभाव का सवाल खडा हो रहा है। ऐसा एकाध नहीं अनेक स्कूलों में बच्चों के विश्लेषण में सामने आ रहा है। इसके चलते थ्योरी में अच्छे नंबर लाने वाले विद्यार्थी को इंटरनल यानिकी प्रेक्टिकल में कम अंक दिए गए और थ्योरी में कम अंक यहां तक की पासिंग अंक लाने वाले विद्यार्थियों को प्रेक्टिकल के पूरे अंक दिए जाने पर सवाल खडा हो रहा है।

ऐसे समझें मामले को-

एक सीबीएसई निजी विद्यालय में कक्षा 10 वीं के 40 विद्यार्थी में से 15 को प्रेक्टिकल के पूरे अंक 20 में से 20 दिए गए,जबकि उन्हें थ्योरी के 80 अंक में से मात्र 15 से 17 अंक ही मिले हैं। इसके विरूद्ध कक्षा के शेष 25 बच्चों ने थ्योरी के 80 अंकों में से किसी ने 60 फीसदी एवं किसी ने 70 फीसदी अंक अर्जित किए उसके बावजूद उन्हें प्रेक्टिकल के इंटरनल स्कूल से 20 में से किसी को 12 और किसी को 15 से 17 अंक ही दिए गए।

ऐसे होती है इंटरनल प्रेक्टिकल परीक्षा-

इधर शिक्षा विभाग के अधिकारी बताते हैं कि प्रेक्टिकल परीक्षा के अलग-अलग विषयों के लिए बाहर से दुसरे विद्यालय से एक्सटर्नल को भेजा जाता है। वे प्रेक्टिकल की परीक्षा लेकर मौखिक रूप से सवालों के जवाब जिसे वाय-वाय कहा जाता है लेते हैं। इसी आधार पर विद्यार्थियों को नंबर दिए जाते हैं। इस पूरे कार्य में एक्सटर्नल के साथ विद्यालय प्रबंधन की और से एक प्रमुख शिक्षक एक्सटर्नल का सहयोगी बनाया जाता है। उसी के प्रबंधन में यह पूरी परीक्षा ली जाती है। आने वाला एक्सटर्नल निजी स्कूल के प्रबंधन से सहयोगात्मक स्थिति में प्रभावित ही रहता है।

मुख्य परीक्षा से पूर्व बोर्ड में पहुंचते हैं नंबर-

निजी विद्यालयों में नियमित विद्यार्थियों की प्रेक्टिकल परीक्षा बोर्ड की मुख्य परीक्षा से पूर्व ही आयोजित कर ली जाती है। एक्सटर्नल परीक्षा लेकर नंबर की शीट तैयार कर उस पर हस्ताक्षर कर संबंधित स्कूल को देते हैं। दावा तो यहां तक किया जा रहा  है कि एक्सटर्नल बोर्ड को आनलाईन विद्यार्थियों के नंबर नामजद विद्यालय से ही भेजते हैं। मुख्य परीक्षा के आयोजन के बाद थ्योरी के नंबर सहित प्रेक्टिकल के नंबर घोषित किए जाते हैं।

कोचिंग का टंटा भी सवालों में-

बच्चे विश्लेषण के साथ बताते हैं कि कतिपय निजी उनके विद्यालय में कुछ बच्चे स्कूल शिक्षक के यहां ट्यूशन पर जाते थे उन्हें प्रेक्टिकल में 20 के 20 मार्क एवं न्यूनतम 18 मार्क दिए गए हैं। कहीं भी टयूशन न जाने वाले एवं अन्य कोचिंग पर जाने वाले विद्यार्थियों को 20 में से 12 से 17 अंक ही प्रेक्टिकल में दिए गए हैं। बच्चे नाम न छापने की शर्त पर ऐसे कई विद्यार्थियों के नाम भी गिनाते हैं। निजी कोचिंग वाले भी इसकी पुष्टि करते हैं ।

ऐसे पिछडे योग्य –

बच्चों ने बताया कि थ्योरी में अच्छे अंक लाने वाले विद्यार्थी को 77 प्रतिशत अंक मिले। अगर प्रेक्टिकल के उसे पूरे अंक मिल जाते तो वह 80 प्रतिशत अंक की स्थिति में रहता। इसकी अपेक्षा थ्योरी में न्यूनतम अंक लाने वाले विद्यार्थी को प्रेक्टिकल में पूरे अंक मिलने पर उसका परिणाम उच्च हो जाता है।

ये है पासिंग मार्क का गणित-

सीबीएसई में विद्यार्थी को प्रेक्टिकल एवं थ्योरी दोनों मार्क जोडकर पास किया जाता है। थ्योरी के 80 नंबर का पेपर होता है। एवं प्रेक्टिकल 20 नंबर का ऐसे में विद्यार्थी को थ्योरी में अगर 13 नंबर आए और प्रेकिटकल में उसे 20 के पूरे 20 मिलते हैं तो उसे पास माना जाता है। इसकी बजाय माध्यमिक शिक्षा मंडल में विद्यार्थी को एक तिहाई अंक पास होने के लिए थ्योरी एवं प्रेकिटकल दोनों में अलग-अलग लाना होता है।

-ऐसा है तो गलत है। विद्यार्थी की क्षमता के आधार पर ही प्रेक्टिकल के अंक कापी की जांच एवं वाय-वाय के आधार पर ही दिए जाते हैं। अगर बच्चे स्वयं की कापी देखना चाहें तो सूचना के अधिकार सहित अन्य प्रावधान में कापी की जेराक्स ले सकते हैं। दुसरे की कापी का प्रावधान नहीं है। लिखित शिकायत पर हीं इसमें सीबीएसई एक्शन लेगा। माध्यमिक शिक्षा मंडल के मामले में समन्वय संस्था में प्रेक्टिकल की कापी जमा होती है।

-महेन्द्र खत्री, प्रभारी जिला शिक्षा अधिकारी,उज्जैन

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